
चुनाव जीतने नहीं, हिंदुस्तान बदलने की राजनीति करें
कांग्रेस ने भी अपना काम ठीक से नहीं किया
लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमें चुनाव जीतने वाला नहीं बल्कि हिंदुस्तान बदलने की राजनीति करना होगा। हिंदुस्तान के पावर स्ट्रक्चर में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को शामिल करना होगा।
उन्होंने 85 फीसदी ही हिस्सेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि जवाहर लाल नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। वह लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कांग्रेस की ओर से आयोजित कांशीराम जयंती एवं दलित
संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कांशीराम के अंदाज में जेब से कलम निकाली। उसका कैप हटाया और कहा कि कैप हटाने से ही पेन चलेगी यानी 85 फीसदी को हक मिलेगा। मगर भाजपा जब से सत्ता में आई उसने एक नया सिस्टम निकाला है पेन और ढक्कन को अलग कर दिया है और 85 प्रतिशत को फेंक दिया और 15 प्रतिशत को लेकर घूम रही है। उन्होंने कांग्रेस में भी कई कमियां थीं। यदि कांग्रेस अपना काम करती तो कांशीराम सफल नहीं होते। लेकिन उस वक्त कांग्रेस ने अपना काम सही तरीके से नहीं किया। हां, इतना जरूर है कि यदि जवाहर लाल नेहरू होते तो कांशीराम
प्रधानमंत्री बनते। क्योंकि वह हक के लिए लड़ रहे थे। राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम समाज में बराबरी की बात करते थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में कांशीराम जैसे 100 ऐसे लोग मिल जाए तो सियासी तस्वीर बदल सकती है। हमारे पास मौका है। हमारे पास 100 ऐसे लोग होने चाहिए, जो कहें कि हम मर जाएंगे लेकिन संविधान नहीं छोड़ेंगे। संविधान सबसे जरूरी है। इसकी मरते दम तक रक्षा करेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि जाति जनगणना होगी और पिछड़ों, दलितों आदिवासियों को पावर स्ट्रक्चर में जगह मिलेगी। इसी से बदलाव आएगा। उन्होंने संविधान की प्रति हाथ में लेकर हिलाया और कहा कि संविधान में महात्मा गांधी और डा.
आंबेडकर के विचार हैं। इसमें नाथूराम गोडसे और सावरकर के विचार नहीं है। यही वजह है कि नरेंद्र मोदी इस संविधान को नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि कहने के लिए हम सभी को हिंदुस्तानी कहेंगे, लेकिन जब देश चलाने और पावर
देने की बात आएगी तो उन्हें कुछ और कहा जाएगा। यह संविधान के खिलाफ है।उन्होंने कहा कि संविधान एक किताब ही नहीं है। इसमें हिंदुस्तान के हजारों साल की आवाज है।
नरेंद्र मोदी ने किया सरेंडर- राहुल
लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित दलित संवाद में केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विदेश नीति में नरेंदर ने सरेंडर कर दिया है। नरेंद्र मोदी ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी से समझौता कर दिया है। क्योंकि अब अमेरिका तय कर रहा है कि हम तेल कहां से लेंगे? एनर्जी सेक्टर के हालात अभी और खराब होंगे। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। राजनीति
में मन में पहले हार होती है। मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे। वह अमेरिका के लिए काम कर रहे हैं।
नरेंद्र मोदी ने किया सरेंडर- राहुल
लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को लखनऊ में
आयोजित दलित संवाद में केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विदेश नीति
में नरेंदर ने सरेंडर कर दिया है। नरेंद्र मोदी ने देश की एनर्जी
सिक्योरिटी से समझौता कर दिया है। क्योंकि अब अमेरिका तय कर रहा है कि हम
तेल कहां से लेंगे? एनर्जी सेक्टर के हालात अभी और खराब होंगे। राहुल गांधी
ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। राजनीति
में मन में पहले हार होती है। मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे। वह
अमेरिका के लिए काम कर रहे हैं। जब मैं यह बात संसद में बोलने जा रहा था तो
नरेंद्र मोदी भाग गए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्होंने आरोप लगाया कि
पेट्रोलियम मंत्री हरदीपपुरी का नाम एपस्टीन फाइल में है। उनकी बेटी की
कंपनी में जॉर्ज सोरोस की फंडिंग है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने
ट्रंप को फोन किया और डील पर साइन करने के लिए हामी भर दी। हिंदुस्तान के
डेटा के बिना चाइना खड़ा नहीं हो सकता है। हिंदुस्तान की जनता का डेटा
अमेरिका को दे दिया। नरेंद्र मोदी ने कहा कि 9 लाख करोड़ का माल अमेरिका
से खरीदेंगे। मैं पूछना चाहता हूं, हमारे बिजनेस का क्या करेंगे। कपास, फल,
बादाम आदि अब अमेरिका के किसान यहां बेचेंगे। जब सारा माल अमेरिका से आयेगा
तो हमारे किसान कहां जाएंगे? हिंदुस्तान को यूएस डील से कुछ नहीं मिला।
कांग्रेस गरीब पार्टी बनी रहे तभी अच्छा
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस गरीब पार्टी है। कांग्रेस के बड़े-बड़े
नेता अमीर हैं। हम अमीर पार्टी होना ही नहीं चाहते हैं। जिस दिन अमीर बन
जाएगी, उसी दिन हमारी हालत भी भाजपा जैसी हो जाएगी। उन्होंने लोकसभा चुनाव
का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त बताया गया कि हमारे खाते फ्रीज कर दिए गए
हैं, लेकिन कांग्रेस पर रुकावट नहीं आई। कांग्रेस चलती रही।
हिस्सेदारी लेनी होगी
राहुल गांधी ने हाल में मौजूद लोगों की ओर हाथ उठाकर आह्वान किया। कहा कि
किसी प्राइवेट अस्पताल में कितने दलित व पिछड़े डॉक्टर हैं? किसी कंपनी में
कितने सीईओ हैं? संविधान कहता है कि यह देश सबका है। वन मैन, वन वोट। जितनी
आबादी, उतनी भागीदारी, यह संविधान कहता है। फिर भी क्यों नहीं मिल रहा है?
उन्होंने कहा कि मनरेगा में 85 फीसदी दलित व पिछड़े मिल जाएंगे, लेकिन
यूनिवर्सिटी में नहीं मिलेंगे। आरएसएस की सूची में भी दलित, पिछड़े नहीं
मिलेंगे। इंटरव्यू में बच्चों को निकालने का तरीका है। आपकी जाति क्या है?
जैसे ही पता चलता है, वह बच्चा फेल हो जाता है।
कांशीराम और सावरकर में फर्क है
उन्होंने कहा कि मुख्य बात यह है कि आंबेडकर और कांशीराम ने कभी
कंप्रोमाइज्ड नहीं किया। अगर कांशीराम कंप्रोमाइज्ड हो गए होते तो इनकी
फोटो यहां नहीं लगती। महात्मा गांधी, डा. अंबेडकर, काशीराम और सावरकर में
फर्क है। यदि वे अपने विचारों पर कंप्रोमाइज्ड हो जाते तो यहां फोटो नहीं लगती।
मंच पर नहीं पहुंच पाए अनिवाश पांडेय सहित कई नेता
दलित संवाद कार्यकर्म के दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, सांसद तनुज
पुनिया सहित कई नेता मंच पर नहीं पहुंच पाए। ऐसे में उन्हें नीचे ही बैठना
पड़ा। बताया जा रहा है कि जाम की वजह से ये नेता हाल में देर में पहुंचे
तब तक राहुल गांधी की सुरक्षा में लगे कर्मियों ने मंच को घेरे में ले लिया
था। इसी तरह मीडियाकर्मियों व अन्य लोगों को भी हाल में नहीं जाने दिया
गया। यहां तक कि राहुल गांधी के पहुंचने से पहले जो मीडियाकर्मी हाल में
पहुंच गए थे। उन्हें एक-एक फोटो करने के बाद बाहर निकाल दिया गया।
कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग
दलित संवाद कार्यक्रम में कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास किया
है। तय हुआ है कि राहुल गांधी के माध्यम से संसद में यह मांग उठाई जाएगी।
मौके पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल
जयहिंद, अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश
प्रभारी अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, सेवानिवृत्त न्यायाधीश
वीरेंद्र सिंह यादव, राकेश राठौर, अनिल यादव, मनोज यादव, आराधना मिश्रा
मोना, धीरज गुर्जर, प्रदीप नरवाल, सत्यनारायण, तनुज पुनिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे
कांशीराम के बहाने दलित वोटबैंक को साधने की तैयारी
यूं ही नहीं सभी दलों के लिए जरूरी हो गए हैं कांशीराम
बसपा ही नहीं सपा और कांग्रेस भी धूमधाम से मना रही है कांशीराम की जयंती
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। बसपा संस्थापक कांशीराम को याद करने के लिए सभी सियासी दलों में होड़
लगी है। यह अनायास नहीं है बल्कि इसके पीछे दलित वोटबैंक की ताकत है। यही
वजह है कि बसपा ही नहीं सपा और कांग्रेस भी अपने- अपने तरीके से कांशीराम
की जयंती मना रही है। भाजपा भी इस मुद्दे पर सॉफ्ट है।
बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को है। उनकी जयंती से पहले ही
सभी दल अलग- अलग कार्यक्रम घोषित कर दिए हैं। बसपा लखनऊ में जनसभा होगी।
साथ ही अलग- अलग प्रदेशों में कार्यक्रम हो रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने भी
सभी जिलों में कांशीराम की जयंती मनाने का ऐलान किया है। कांग्रेस ने
शुक्रवार को जयंती समारोह और दलित संवाद का आयोजन किया। कार्यक्रम में
पहुंचे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जेब से पेन निकाल कर
कांशीराम की हूबहू नकल किया। कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास
किया गया। राहुल गांधी का यह कहना है कि जवाहर लाल नेहरू होते तो कांशीराम
मुख्यमंत्री बने। यह कथन भी किसी न किसी रूप में सियासी रणनीति का हिस्सा
है। विभिन्न दलों का अचानक कांशीराम के प्रति उमड़े प्रेम के पीछे दलितों
वोटैंक हैं, जो इन दिनों किसी न किसी रूप में चौराहे पर खड़ा है। उसे हर दल
अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगा है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21
फीसदी है। प्रदेश की 85 विधानासभा सीटें अनुसूचित जाति (दलित) के लिए
आरक्षित हैं, लेकिन अन्य सीटों पर भी दलित वोटबैंक का महत्व निर्विवाद है।
यह चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
क्या कहते हैं जानकार
कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रही है सपा
समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान कहते हैं कि कांशीराम
हमेशा दलित- पिछड़ों के हाथ में सत्ता की ताकत देन चाहते थे। सपा अध्यक्ष
अखिलेश यादव भी अब उसी रास्ते पर चल रहे हैं। वह जाति जनगणना कराकर आबादी
के अनुपात में हर वर्ग को भागीदारी देने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कांशीराम ने
दलितों को सांसद, विधायक बनाया, जबकि बसपा धनाढ्य लोगों को टिकट देती है।
लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बामसेफ कैडर के वंशीधर बौद्ध को विधानसभा
भेजकर यह साबित किया कि वह कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रहे हैं।
बसपा को लेकर संशय में है दलित वोटबैंक
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो राजेंद्र वर्मा कहते हैं कि सियासी दल वोटबैंक
के हिसाब से अपना नजरिया बदलते हैं। इन दिनों दलित वोटबैंक बसपा को लेकर
संशय में है। यह वोटबैंक डा. भीमराव आंबेडकर के बाद कांशीराम को अपना आदर्श
मानता है। यही वजह है कि इस वर्ष कांशीराम की जयंती पर तमाम बड़े कार्यक्रम
हो रहे हैं। कांग्रेस बसपा संस्थापक कांशीराम द्वारा दिए गए नारे जिसकी
जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी को फिर से पुनर्जीवित करके अपना
सियासी वनवास खत्म करने की कोशिश में जुटी है।
कांग्रेस ने हमेशा रखा दलितों का साथ
कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव कहते हैं कि
कांग्रेस ने हमेशा दलितों का ध्यान रखा है। अब कांशीराम के विचारों को आम
लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। यही वजह है कि लखनऊ में आयोजित
कार्यक्रम में खुद राहुल गांधी हिस्सा ले रहे हैं। यहां से शुरू होने वाले
अभियान पूरे प्रदेश में पहुंचेगा और कांशीराम के विचारों को जन- जन तक पहुंचाया जाएगा।
———- Forwarded message ———
From: Chandra Bhan Yadav<chandrab@knp.amarujala.com>
Date: Fri, 13 Mar, 2026, 9:33 pm
Subject:
To: Chandrabhan Bhan <chandrabhan0502@gmail.com>
जवाहर लाल नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम सीएम होते- राहुल गांधी
चुनाव जीतने नहीं, हिंदुस्तान बदलने की राजनीति करें
कांग्रेस ने भी अपना काम ठीक से नहीं किया
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमें चुनाव जीतने
वाला नहीं बल्कि हिंदुस्तान बदलने की राजनीति करना होगा। हिंदुस्तान के
पावर स्ट्रक्चर में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को शामिल करना होगा।
उन्होंने 85 फीसदी ही हिस्सेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि जवाहर लाल नेहरू
जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। वह लखनऊ के इंदिरा
गांधी प्रतिष्ठान में कांग्रेस की ओर से आयोजित कांशीराम जयंती एवं दलित
संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कांशीराम के अंदाज में जेब से कलम निकाली। उसका कैप हटाया
और कहा कि कैप हटाने से ही पेन चलेगी यानी 85 फीसदी को हक मिलेगा। मगर
भाजपा जब से सत्ता में आई उसने एक नया सिस्टम निकाला है पेन और ढक्कन को
अलग कर दिया है और 85 प्रतिशत को फेंक दिया और 15 प्रतिशत को लेकर घूम रही
है। उन्होंने कांग्रेस में भी कई कमियां थीं। यदि कांग्रेस अपना काम करती
तो कांशीराम सफल नहीं होते। लेकिन उस वक्त कांग्रेस ने अपना काम सही तरीके
से नहीं किया। हां, इतना जरूर है कि यदि जवाहर लाल नेहरू होते तो कांशीराम
प्रधानमंत्री बनते। क्योंकि वह हक के लिए लड़ रहे थे। राहुल गांधी ने कहा
कि कांशीराम समाज में बराबरी की बात करते थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का
आह्वान करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में कांशीराम जैसे
100 ऐसे लोग मिल जाए तो सियासी तस्वीर बदल सकती है। हमारे पास मौका है।
हमारे पास 100 ऐसे लोग होने चाहिए, जो कहें कि हम मर जाएंगे लेकिन संविधान
नहीं छोड़ेंगे। संविधान सबसे जरूरी है। इसकी मरते दम तक रक्षा करेंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि जाति जनगणना होगी और पिछड़ों, दलितों आदिवासियों को
पावर स्ट्रक्चर में जगह मिलेगी। इसी से बदलाव आएगा। उन्होंने संविधान की
प्रति हाथ में लेकर हिलाया और कहा कि संविधान में महात्मा गांधी और डा.
आंबेडकर के विचार हैं। इसमें नाथूराम गोडसे और सावरकर के विचार नहीं है।
यही वजह है कि नरेंद्र मोदी इस संविधान को नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि
कहने के लिए हम सभी को हिंदुस्तानी कहेंगे, लेकिन जब देश चलाने और पावर
देने की बात आएगी तो उन्हें कुछ और कहा जाएगा। यह संविधान के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि संविधान एक किताब ही नहीं है। इसमें हिंदुस्तान के हजारों साल की आवाज है।
नरेंद्र मोदी ने किया सरेंडर- राहुल
लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को लखनऊ में
आयोजित दलित संवाद में केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विदेश नीति
में नरेंदर ने सरेंडर कर दिया है। नरेंद्र मोदी ने देश की एनर्जी
सिक्योरिटी से समझौता कर दिया है। क्योंकि अब अमेरिका तय कर रहा है कि हम
तेल कहां से लेंगे? एनर्जी सेक्टर के हालात अभी और खराब होंगे। राहुल गांधी
ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। राजनीति
में मन में पहले हार होती है। मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे। वह
अमेरिका के लिए काम कर रहे हैं। जब मैं यह बात संसद में बोलने जा रहा था तो
नरेंद्र मोदी भाग गए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्होंने आरोप लगाया कि
पेट्रोलियम मंत्री हरदीपपुरी का नाम एपस्टीन फाइल में है। उनकी बेटी की
कंपनी में जॉर्ज सोरोस की फंडिंग है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने
ट्रंप को फोन किया और डील पर साइन करने के लिए हामी भर दी। हिंदुस्तान के
डेटा के बिना चाइना खड़ा नहीं हो सकता है। हिंदुस्तान की जनता का डेटा
अमेरिका को दे दिया। नरेंद्र मोदी ने कहा कि 9 लाख करोड़ का माल अमेरिका
से खरीदेंगे। मैं पूछना चाहता हूं, हमारे बिजनेस का क्या करेंगे। कपास, फल,
बादाम आदि अब अमेरिका के किसान यहां बेचेंगे। जब सारा माल अमेरिका से आयेगा
तो हमारे किसान कहां जाएंगे? हिंदुस्तान को यूएस डील से कुछ नहीं मिला।
कांग्रेस गरीब पार्टी बनी रहे तभी अच्छा
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस गरीब पार्टी है। कांग्रेस के बड़े-बड़े
नेता अमीर हैं। हम अमीर पार्टी होना ही नहीं चाहते हैं। जिस दिन अमीर बन
जाएगी, उसी दिन हमारी हालत भी भाजपा जैसी हो जाएगी। उन्होंने लोकसभा चुनाव
का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त बताया गया कि हमारे खाते फ्रीज कर दिए गए
हैं, लेकिन कांग्रेस पर रुकावट नहीं आई। कांग्रेस चलती रही।
हिस्सेदारी लेनी होगी
राहुल गांधी ने हाल में मौजूद लोगों की ओर हाथ उठाकर आह्वान किया। कहा कि
किसी प्राइवेट अस्पताल में कितने दलित व पिछड़े डॉक्टर हैं? किसी कंपनी में
कितने सीईओ हैं? संविधान कहता है कि यह देश सबका है। वन मैन, वन वोट। जितनी
आबादी, उतनी भागीदारी, यह संविधान कहता है। फिर भी क्यों नहीं मिल रहा है?
उन्होंने कहा कि मनरेगा में 85 फीसदी दलित व पिछड़े मिल जाएंगे, लेकिन
यूनिवर्सिटी में नहीं मिलेंगे। आरएसएस की सूची में भी दलित, पिछड़े नहीं
मिलेंगे। इंटरव्यू में बच्चों को निकालने का तरीका है। आपकी जाति क्या है?
जैसे ही पता चलता है, वह बच्चा फेल हो जाता है।
कांशीराम और सावरकर में फर्क है
उन्होंने कहा कि मुख्य बात यह है कि आंबेडकर और कांशीराम ने कभी
कंप्रोमाइज्ड नहीं किया। अगर कांशीराम कंप्रोमाइज्ड हो गए होते तो इनकी
फोटो यहां नहीं लगती। महात्मा गांधी, डा. अंबेडकर, काशीराम और सावरकर में
फर्क है। यदि वे अपने विचारों पर कंप्रोमाइज्ड हो जाते तो यहां फोटो नहीं लगती।
मंच पर नहीं पहुंच पाए अनिवाश पांडेय सहित कई नेता
दलित संवाद कार्यकर्म के दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, सांसद तनुज
पुनिया सहित कई नेता मंच पर नहीं पहुंच पाए। ऐसे में उन्हें नीचे ही बैठना
पड़ा। बताया जा रहा है कि जाम की वजह से ये नेता हाल में देर में पहुंचे
तब तक राहुल गांधी की सुरक्षा में लगे कर्मियों ने मंच को घेरे में ले लिया
था। इसी तरह मीडियाकर्मियों व अन्य लोगों को भी हाल में नहीं जाने दिया
गया। यहां तक कि राहुल गांधी के पहुंचने से पहले जो मीडियाकर्मी हाल में
पहुंच गए थे। उन्हें एक-एक फोटो करने के बाद बाहर निकाल दिया गया।
कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग
दलित संवाद कार्यक्रम में कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास किया
है। तय हुआ है कि राहुल गांधी के माध्यम से संसद में यह मांग उठाई जाएगी।
मौके पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल
जयहिंद, अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश
प्रभारी अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, सेवानिवृत्त न्यायाधीश
वीरेंद्र सिंह यादव, राकेश राठौर, अनिल यादव, मनोज यादव, आराधना मिश्रा
मोना, धीरज गुर्जर, प्रदीप नरवाल, सत्यनारायण, तनुज पुनिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे
कांशीराम के बहाने दलित वोटबैंक को साधने की तैयारी
यूं ही नहीं सभी दलों के लिए जरूरी हो गए हैं कांशीराम
बसपा ही नहीं सपा और कांग्रेस भी धूमधाम से मना रही है कांशीराम की जयंती
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। बसपा संस्थापक कांशीराम को याद करने के लिए सभी सियासी दलों में होड़
लगी है। यह अनायास नहीं है बल्कि इसके पीछे दलित वोटबैंक की ताकत है। यही
वजह है कि बसपा ही नहीं सपा और कांग्रेस भी अपने- अपने तरीके से कांशीराम
की जयंती मना रही है। भाजपा भी इस मुद्दे पर सॉफ्ट है।
बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को है। उनकी जयंती से पहले ही
सभी दल अलग- अलग कार्यक्रम घोषित कर दिए हैं। बसपा लखनऊ में जनसभा होगी।
साथ ही अलग- अलग प्रदेशों में कार्यक्रम हो रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने भी
सभी जिलों में कांशीराम की जयंती मनाने का ऐलान किया है। कांग्रेस ने
शुक्रवार को जयंती समारोह और दलित संवाद का आयोजन किया। कार्यक्रम में
पहुंचे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जेब से पेन निकाल कर
कांशीराम की हूबहू नकल किया। कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास
किया गया। राहुल गांधी का यह कहना है कि जवाहर लाल नेहरू होते तो कांशीराम
मुख्यमंत्री बने। यह कथन भी किसी न किसी रूप में सियासी रणनीति का हिस्सा
है। विभिन्न दलों का अचानक कांशीराम के प्रति उमड़े प्रेम के पीछे दलितों
वोटैंक हैं, जो इन दिनों किसी न किसी रूप में चौराहे पर खड़ा है। उसे हर दल
अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगा है। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21
फीसदी है। प्रदेश की 85 विधानासभा सीटें अनुसूचित जाति (दलित) के लिए
आरक्षित हैं, लेकिन अन्य सीटों पर भी दलित वोटबैंक का महत्व निर्विवाद है।
यह चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
क्या कहते हैं जानकार
कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रही है सपा
समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान कहते हैं कि कांशीराम
हमेशा दलित- पिछड़ों के हाथ में सत्ता की ताकत देन चाहते थे। सपा अध्यक्ष
अखिलेश यादव भी अब उसी रास्ते पर चल रहे हैं। वह जाति जनगणना कराकर आबादी
के अनुपात में हर वर्ग को भागीदारी देने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कांशीराम ने
दलितों को सांसद, विधायक बनाया, जबकि बसपा धनाढ्य लोगों को टिकट देती है।
लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बामसेफ कैडर के वंशीधर बौद्ध को विधानसभा
भेजकर यह साबित किया कि वह कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रहे हैं।
बसपा को लेकर संशय में है दलित वोटबैंक
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो राजेंद्र वर्मा कहते हैं कि सियासी दल वोटबैंक
के हिसाब से अपना नजरिया बदलते हैं। इन दिनों दलित वोटबैंक बसपा को लेकर
संशय में है। यह वोटबैंक डा. भीमराव आंबेडकर के बाद कांशीराम को अपना आदर्श
मानता है। यही वजह है कि इस वर्ष कांशीराम की जयंती पर तमाम बड़े कार्यक्रम
हो रहे हैं। कांग्रेस बसपा संस्थापक कांशीराम द्वारा दिए गए नारे जिसकी
जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी को फिर से पुनर्जीवित करके अपना
सियासी वनवास खत्म करने की कोशिश में जुटी है।
कांग्रेस ने हमेशा रखा दलितों का साथ
कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव कहते हैं कि
कांग्रेस ने हमेशा दलितों का ध्यान रखा है। अब कांशीराम के विचारों को आम
लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। यही वजह है कि लखनऊ में आयोजित
कार्यक्रम में खुद राहुल गांधी हिस्सा ले रहे हैं। यहां से शुरू होने वाले
अभियान पूरे प्रदेश में पहुंचेगा और कांशीराम के विचारों को जन- जन तक पहुंचाया जाएगा।

