
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा परिषद लगातार राहत योजना के नियमों को सरल बनाने की मांग करता रहा है। बुधवार को विधानसभा में एक सवाल के जवाब में चर्चा के दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने इस पर सहमति जताई है। उपभोक्ता परिषद ऊर्जा मंत्री के बयान का स्वागत करती है। ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिन किसानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनसे बिजली बिल की मांग नहीं की जा रही है । उनसे अपील की गई है कि वे शीघ्र पंजीकरण कराएं। यह बयान किसानों के हित में सकारात्मक पहल है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार 1 अप्रैल 2023 से प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों में निजी नलकूप (कृषि) उपभोक्ताओं को 140 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिमाह निःशुल्क विद्युत उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था। योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए 31 मार्च 2023 तक के विद्युत बिलों का पूर्ण भुगतान एवं मीटर की स्थापना अनिवार्य शर्त के रूप में निर्धारित की गई थी।
31 जनवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे प्रदेश में निजी नलकूपों के लगभग 15.64 लाख विद्युत कनेक्शन हैं। लेकिन दो वर्ष से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद केवल 10.58 लाख किसानों ने ही पंजीकरण कर योजना का लाभ ले रहे हैं। लगभग 5.10 लाख किसान अभी भी इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित हैं।
उपभोक्ता परिषद का स्पष्ट मत है कि जब सरकार की मंशा प्रत्येक पात्र किसान को योजना का लाभ पहुंचाने की है, तब पावर कॉरपोरेशन को अपनी अनिवार्य शर्तों में आवश्यक संशोधन करते हुए उन्हें और सरल एवं व्यवहारिक बनाना चाहिए, ताकि शेष वंचित किसानों को भी शीघ्र लाभ मिल सके।
उपभोक्ता परिषद पुनः एक बार मांग करती है कि:
बकाया भुगतान से संबंधित शर्तों में व्यावहारिक राहत दी जाए।
मीटर स्थापना की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाया जाए।
पंजीकरण प्रक्रिया को ग्राम स्तर पर कैंप लगाकर सुगम किया जाए।

