उत्तर प्रदेश

वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह

 उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा गर्मी में विद्युत व्यवस्था को संभालना होगा मुश्किल। 

वर्टिकल व्यवस्था और संविदा कर्मियों को की छटनी दिखाएंगे रंग।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश की बिजली कंपनियों में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश जनपदों में वर्टिकल व्यवस्था लागू किए जाने के बाद उपभोक्ताओं की समस्याओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। विद्युत दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ी है तथा 1912 हेल्पलाइन केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता में असंतोष व्याप्त है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा इस बार पीक डिमांड गर्मी में 32000 मेगावाट से लेकर 33000 मेगावाट के बीच में रहने वाली है जिसके लिए बिजली का इंतजाम जितना जरूरी है उससे ज्यादा जरूरी मैन पावर व सामग्री की जरूरत होगी दोनों पर बिजली कंपनियां गंभीर नहीं है

उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 3 करोड़ 72 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं, जिनके द्वारा लिया जाने वाला कुल भार लगभग 8 करोड़ किलोवाट से अधिक है, जबकि 132 केवी सब-स्टेशनों की उपलब्ध क्षमता लग 6 करोड़ किलोवाट के आसपास है। इस स्थिति में सुचारु एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संविदा एवं नियमित कार्मिकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, किंतु इसके विपरीत छंटनी की जा रही है।

परिषद का मत है कि आने वाले ग्रीष्मकाल में वर्तमान वर्टिकल व्यवस्था उपभोक्ताओं एवं सरकार—दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। अभी भी समय है कि पावर कॉरपोरेशन बिजली कंपनियों में प्रयोगात्मक बदलाव बंद कर व्यावहारिक एवं उपभोक्ता-केंद्रित व्यवस्था पर ध्यान दे। इस बार की गर्मी मैं वर्टिकल व्यवस्था की पोल खोलना तय है

अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन निजीकरण के प्रयासों में विफल रहने के बाद एक ऐसा नैरेटिव स्थापित करना चाहता है, जिससे यह प्रदर्शित हो कि विभागीय कार्मिक एवं अभियंता विद्युत व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं हैं और इसलिए निजीकरण आवश्यक है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1959 में गठित राज्य विद्युत परिषद की प्रमाणित एवं सुदृढ़ व्यवस्था को वर्ष 2024 के बाद मनमाने ढंग से परिवर्तित किया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में विद्युत व्यवस्था विफल होती है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के कुछ चुनिंदा उच्च अधिकारियों की होगी। परिषद ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि ग्रीष्मकाल प्रारंभ होने से पूर्व विद्युत व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का गंभीरता से आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। यदि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उपभोक्ता परिषद ने दावा किया है कि उसने विद्युत व्यवस्था की वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन कर लिया है और समय रहते प्रदेश सरकार को आगाह करना अपना दायित्व समझता है। परिषद का मानना है कि यदि तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर सकती है।

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