
लोगों से गौरक्षा की अपील की, गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने को लेकर अभियान
लखनऊ। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने के लिए अभियान चला रहे हैं। इसके लिए जिलों में यात्रा निकाल रहे हैं। उन्होंने यात्रा के दौरान रायबरेली में राम मंदिर के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान स्वरूप में अयोध्या का राम मंदिर आरएसएस का कार्यालय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब यह मंदिर पूर्ण रूप से बन जाएगा तब सभी दर्शन करने जाएंगे।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शिवगढ़ में अपनी यात्रा के दौरान गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिए जाने की पुरजोर वकालत की है। गाय की रक्षा और राष्ट्रीय माता का दर्जा: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूरे प्रदेश में लोगों से गाय की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि गाय को माता मानने में ही सभी का कल्याण है। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि लोग अनजाने में गाय की अवहेलना कर कितना बड़ा पाप कर रहे हैं, जबकि उन्हें यह समझना होगा कि गाय केवल पशु नहीं, बल्कि एक पूजनीय मां है। उनके अनुसार, यदि गाय को दुख होगा तो सभी को कष्ट होगा, इसलिए विश्व समुदाय को गोमाता की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। वेदों और पुराणों में भी गाय के महत्व को रेखांकित किया गया है और उसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
गाय को पशु कहने वालों को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं
इसके पहले, बाराबंकी में रविवार को त्रिवेदीगंज के गौतौना गांव में समाजवादी पार्टी के नेता गौतम रावत के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में गौ संरक्षण और राम मंदिर निर्माण को लेकर केंद्र व राज्य की राजनीति पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग गाय को माता कहकर सत्ता में आए, वही अब उसे पशु बता रहे हैं। उनके अनुसार गाय को राष्ट्रीय गौमाता घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल गाय को राष्ट्रीय गौमाता घोषित करेगा, उनका समर्थन उसी दल को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो गाय को केवल पशु कहे, उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है, चाहे वह भाजपा, सपा, कांग्रेस या किसी अन्य दल से जुड़ा हो। शंकराचार्य ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर भी दावा किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर उनके मुकदमे की वजह से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के समय उन्होंने विधि-विधान के अनुसार स्थापना करने का आग्रह किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिसके परिणाम आज सामने हैं। इससे पहले शंकराचार्य का चौराहे पर समर्थकों ने स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गौतौना गांव में आयोजित सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे।


