उत्तर प्रदेशउत्तराखंड

बिजली दर बढ़ाने के बजाय 45 प्रतिशत कम की जाए

उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा स्मार्ट मीटर परियोजना का खर्चा और रोस्टर व्यवस्था खत्म हो 

राज्य सलाहकार समिति की बैठक में उपभोक्ता परिषद ने उठाया प्रकरण 

लखनऊ। ऊर्जा क्षेत्र की राज्य सलाहकार समिति की बृहस्पतिवार को विद्युत नियामक आयोग सभागार में हुई बैठक में स्मार्ट मीटर परियोजना पर लंबी बहस हुई। उपभोक्ताओं की मांग को देखते हुए माना जा रहा है कि स्मार्ट मीटर का खर्चा उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। इस परियोजना को बंद करने और रोस्टर व्यवस्था खत्म करने की मांग की गई।

बिजली दर बढ़ाने के बजाय 45 फीसदी कम करने की मांग की गई। तर्क दिया गया कि जब तक उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर सरप्लस है तब तक बिजली दर किसी भी कीमत पर नहीं बढ़ाई जा सकती है।

 नियामक आयोग के अध्यक्ष  अरविंद कुमार की अध्यक्षता एवं सदस्य  संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में हुई बैठक में पावर कॉरपोरेशन द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसके बाद आयोग अध्यक्ष ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष से अपनी बात रखने को कहा, जिस पर उन्होंने कहा कि प्रस्तुतीकरण में सब कुछ स्पष्ट है। फिर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने वैधानिक प्रावधानों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर बिजली कंपनियों की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस है, फिर भी बिजली दरों में कमी का कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया। इसके उलट वर्ष 2026-27 के लिए 16,448 करोड़ रुपये का कृत्रिम घाटा दिखाकर बिजली दरों में बढ़ोतरी की साजिश की जा रही है, जो पूरी तरह गलत और उपभोक्ता विरोधी है उन्होंने कहा कि यदि उपभोक्ताओं का वास्तविक सरप्लस समायोजित किया जाए तो बिजली दरों में एकमुश्त 45 प्रतिशत तक कमी अथवा आगामी पाँच वर्षों तक 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष की कमी संभव है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं की समस्या रखी।। इन दिनों हो रही बिजली कटौती पर आक्रोश जताया। यह भी मांग की कि रोस्टर व्यवस्था खत्म करके हर उपभोक्ता को 24 घंटे बिजली दी जाए। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी उपभोक्ता परिषद की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बिजली दरों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना पर बड़ा हमला

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 3,838 करोड़ रुपये का भार उपभोक्ताओं पर डालना कानून और केंद्र सरकार की नीति  के खिलाफ है।  जिन उपभोक्ताओं ने अपने खर्च पर इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगवाए हैं और जिनमें से 60 प्रतिशत से अधिक अभी भी गारंटी अवधि में हैं, उनके मीटर बदले जाने पर खर्च की भरपाई उपभोक्ताओं को की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वयं स्पष्ट किया था कि स्मार्ट मीटर योजना पूरी तरह मुफ्त होगी और इसका भार उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं पर यह खर्च डालने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसी भी हालत में सफल नहीं होगा। 

रोस्टर व्यवस्था खत्म हो, छोटे दुकानदारों को दें रियायत 

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि जब पूरे देश में रोस्टर व्यवस्था समाप्त हो चुकी है तो उत्तर प्रदेश में अब तक इसे जारी रखना अन्यायपूर्ण है। प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं को बिना भेदभाव 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए। परिषद ने यह भी मांग की कि लगभग 35 लाख गरीब परिवार, जो अपने एक या दो कमरों के मकान में छोटी दुकान चलाकर जीवनयापन कर रहे हैं, उन्हें घरेलू कनेक्शन पर रोजगार चलाने का अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि पावर कॉरपोरेशन पहले इस प्रस्ताव पर सहमत था, लेकिन बाद में पीछे हट गया। अब आयोग को इस पर निर्णय लेना चाहिए।

बिजली विभाग में तत्काल भर्ती शुरू करने की मांग

अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में 3 करोड़ 80 लाख बिजली उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप नियमित बिजली कर्मियों की भारी कमी है। पिछले पाँच वर्षों से टीजी-2, अवर अभियंता, सहायक अभियंता और क्लर्क संवर्ग में भर्ती नहीं हुई है। उन्होंने विद्युत सेवा आयोग के माध्यम से तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग रखते हुए समिति के समक्ष प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया।

नोएडा पावर कंपनी की सीएजी जांच हो 

बैठक में नोएडा पावर कंपनी के प्रबंध निदेशक पी. कुमार ने नोएडा क्षेत्र में दी जा रही 10 प्रतिशत रिबेट समाप्त करने की मांग रखी। इस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि नोएडा पावर कंपनी में बड़े स्तर पर अनियमितताएं और घोटाले हैं, जिनकी तत्काल सीएजी जांच कराई जानी चाहिए।उन्होंने आंकड़ों के आधार पर कहा कि 10 प्रतिशत रिबेट आगामी दो वर्षों तक जारी रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नोएडा पावर कंपनी के लाइसेंस का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम को उसे टेकओवर करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।

टी ओ डी टैरिफ का भी विरोध

बैठक में विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष ने टी ओ डी (टाइम ऑफ डे) टैरिफ पर सभी पक्षों की राय जानी। नोएडा पावर कंपनी ने इसे लागू करने का समर्थन किया, जबकि पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले पायलट प्रोजेक्ट लागू करने की बात कही। इस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि टी ओ डी टैरिफ का मूल उद्देश्य उद्योगों के लिए लोड मैनेजमेंट है, क्योंकि उद्योग अपनी उत्पादन प्रणाली को समय के अनुसार बदल सकते हैं। लेकिन घरेलू उपभोक्ता ऐसा नहीं कर सकते। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं पर टी ओ डी लागू करना उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनेगा। ऐसे में विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने कहा इस पर सभी को अपनी राय रखनी चाहिए जिससे भविष्य में आयोग इस पर कोई ठोस निर्णय ले सके। 

Related Articles

Back to top button