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वेंटिलेटर टेंडर में देरी करने वालों पर कार्रवाई के आदेश

मोतियाबिंद ऑपरेशन के सत्यापन के लिए राज्य स्तर पर बनेगी टीम
लखनऊ। प्रदेश में वर्ष 2022 से वेंटिलेटर टेंडर प्रक्रिया फंसी हुई है। अब इस मामले को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि वेंटिलेटर टेंडर में देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की शनिवार को हुई 136वीं बैठक में अपर मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने मोतियाबिंद ऑपरेशन के सत्यापन को प्राथमिकता देते हुए निर्देशित किया कि राज्य स्तर पर एक विशेष टीम गठित की जाए, जो मंडलीय परियोजना प्रबंधकों के माध्यम से भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करे। उन्होंने यह भी कहा कि 15 दिनों के भीतर सत्यापन रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाए, ताकि नियमानुसार भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी हो सके। विभिन्न प्रकार के कैंसर रोगों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित करने के लिए शीघ्र तिथि प्रस्तावित करने को कहा गया। हिमोफीलिया की रोकथाम के लिए एक सुदृढ़ प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए प्रबंध निदेशक को समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के कार्यों का नियमित मूल्यांकन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित 67 जनपदों में डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित किए जाने की योजना के संदर्भ में यह जानकारी दी गई कि 12 जनपदों में केंद्र क्रियाशील हो चुके हैं, जबकि शेष जनपदों में कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

इसके अतिरिक्त राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई में 40 वर्ष से अधिक आयु के कार्यरत कर्मचारियों का प्रतिवर्ष नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में निदेशक डॉ. पिंकी जोवल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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