
राजधानी से लेकर गांव तक डॉक्टर नदारद — वंशराज दुबे।
लखनऊ। आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ का दावा पूरी तरह सफेद झूठ साबित हो रहा है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के 8,689 पद खाली पड़े हैं और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का भी भारी अभाव है।
इसका सीधा असर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और जिला अस्पतालों पर पड़ रहा है, जहां मरीजों को इलाज के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है और कई बार डॉक्टरों की अनुपस्थिति में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। वंशराज दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने का दावा करती है, लेकिन हकीकत यह है कि राजधानी लखनऊ से लेकर सुदूर गांवों तक सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। 8,600 से अधिक पदों का खाली होना यह बताता है कि भाजपा सरकार के लिए जनता के स्वास्थ्य की कोई प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उनसे मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े खुद सरकार की पोल खोल रहे हैं। विभाग में लेवल-2 के 7,240 पदों में से 5,497 पद खाली हैं, जबकि लेवल-3 के 5,199 पदों में केवल 2,007 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यही नहीं, वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर भी भारी कमी है। संयुक्त निदेशक के 2,555 पदों में से 1,330 पद खाली, एडिशनल डायरेक्टर के 70 पदों में से 58 पद रिक्त, जबकि डिप्टी डायरेक्टर (सर्जन) के 970 पदों में से 157 पद खाली हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर मैनपावर संकट से जूझ रही है। दुबे ने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने 2,391 डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें 601 विशेषज्ञ डॉक्टर और 1,790 एमबीबीएस डॉक्टरों के पद शामिल थे। इसके लिए आवेदन भी लिए गए और जनवरी में इंटरव्यू भी आयोजित हुए, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी भर्ती का परिणाम घोषित नहीं हुआ और पूरी प्रक्रिया मेरिट व पारदर्शिता के विवाद में उलझ गई। इससे यह साफ हो गया है कि भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर कटवाने में ज्यादा दिलचस्पी रखती है।

