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वसूली में कानपुर के दो एआरटीओ निलंबित, आरटीओ से स्पष्टीकरण

दो लिपिक समेत 15 लोगों पर केस, परिवहन कार्यालय में अवैध वसूली का मामल
लखनऊ। कानपुर नगर के संभागीय परिवहन कार्यालय में अनियमितता और अवैध वसूली के मामले में परिवहन विभाग ने दो एआरटीओ को निलंबित कर दिया है। आरटीओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। कार्यालय के दो लिपिक समेत 15 लोगों के खिलाफ काकादेव थाने में केस भी दर्ज कराया गया है। कार्रवाई परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर की गई है।

निलंबित अधिकारियों में एआरटीओ (प्रवर्तन) तृतीय दल सोमलता यादव और एआरटीओ (प्रशासन) आलोक कुमार शामिल हैं। आरटीओ (प्रशासन) राकेन्द्र सिंह से स्पष्टीकरण मांगा गया है। शासन ने अधिकारियों को अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने और कार्यालय में होने वाली गतिविधियों की सही निगरानी नहीं करने का प्रथम दृष्टया दोषी माना है। विभागीय अ​धिकारियों के मुताबिक परिवहन कार्यालय कानपुर में अनधिकृत लोगों के काम करने और आवेदकों से पैसे लेने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद जिलाधिकारी कानपुर के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम ने कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। टीम ने वहां मौजूद करीब 50 लोगों से पूछताछ की। इनमें 11 संदिग्ध लोग मिले, जो वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर लोगों से पैसे ले रहे थे। इनके पास से 43,485 रुपये मिले। जांच में परिवहन कार्यालय के दो लिपिक मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भी संलिप्तता सामने आई। इसके बाद दोनों लिपिक समेत 15 लोगों के खिलाफ काकादेव थाने में केस दर्ज कराया गया।
निरीक्षण के दौरान यूपी 91 एटी 4251 नंबर के ट्रक चालक ने बताया कि परिवहन कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे 26,750 रुपये लिए, लेकिन 21,750 रुपये की ही जमा पर्ची दी। कैश के मिलान में भी 5,000 रुपये की अनियमितता मिली। जिलाधिकारी ने निरीक्षण की रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजी थी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि कार्यालयों में अनधिकृत लोगों से काम कराने पर रोक है। इसके बावजूद कानपुर कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अनधिकृत लोग काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

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