
केजीएमयू कुलपति चयन को लेकर राजनीति गरमाई
राज्यपाल से सामाजिक न्याय की अपील
लखनऊ। केजीएमयू कुलपति चयन को लेकर विपक्ष के बाद अब सत्ता पक्ष के विधायकों एवं मंत्रियों ने भी राज्यपाल को पत्र लिखना शुरु कर दिया है। सभी की एक ही मांग है कि दागी लोगों को कुलपति की कुर्सी न सौंपी जाए और दलित व ओबीसी को कुलपति बनाया जाए।

केजीएमयू कुलपति चयन के लिए साक्षात्कार हो गया है। करीब 123 वर्ष के इतिहास में अभी तक केजीएमयू के मुखिया पद पर किसी दलित एवं ओबीसी प्रोफेसर को मौका नहीं मिला है। ऐसे में सपा विधायक रागिनी सोनकर, सांसद आरके चौधरी, सांसद लालजी वर्मा, सांसद चंद्रशेखर आजाद, पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्यपाल को पत्र लिखा। अब पंचायती राज एवं अल्पंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर एवं भाजपा विधायक गौरी शंकर वर्मा ने भी राज्यपाल को पत्र लिखा है। भेजे गए पत्र में कहा गया है कि केजीएमयू के नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया चल रही है। राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री आदि महत्वपूर्ण पदों पर दलित वर्ग को कई बार प्रतिनिधित्व दिया गया है, लेकिन केजीएमयू का मुखिया अभी तक दलित नहीं बना है। चयन समिति में भी अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व नहीं रहा। ऐसे में अंतिम चयन सूची में भी दलित वर्ग के किसी प्रोफेसर का नाम शामिल नहीं किए जाने की आशंका है। सूची में ऐसे लोगों का भी नाम है, जो लोहिया संस्थान और केजीएमयू में रहते हुए नियम-कानून को ताक पर रखकर दलित-पिछड़ों के पदों का आरक्षण घोटाला किया है। इस बारे में जन भवनको लगातार शिकायतें भी भेजी गई हैं। मामले की जांच भी चल रही है। केजीएमयू के कुलपति पद पर यदि गैर दलित को ही तैनात करना चाहें, तो कम से कम ऐसे पदों से अब तक वंचित प्रोफेसर को अवसर दिया जाना न्यायाचित होगा। पत्र भेजने वाले जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुलपति पद के लिए चयन समिति द्वारा किया गया कार्य सरकार एवं संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत है, जिससे सामाजिक न्याय एवं सबको समान अवसर देने की अवधारणा का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि पूरी प्रक्रिया पर हस्तक्षेप करें और दलित व पिछड़े वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने की कृपा करें।



