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मंदिर से लेकर ट्रस्ट तक मोदी के नेतृत्व में हुआ तो चोरी का आरोप भी क्यों न मानें?: आरपी गौतम

यूपी पहुंचे प्रदेश प्रभारी का हुआ भव्य स्वागत

लखनऊ। कांग्रेस के नव नियुक्त उत्तर प्रदेश  प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होते हुए लखनऊ पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर बनने से लेकर ट्रस्ट बनाने तक का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ। वह इसका श्रेय लेते हैं। फिर चंदा चोरी में उनकी संलिप्तता क्यों न मानी जाए?  वह इसका श्रेय क्यों नहीं ले रहे हैं? पूरे मामले को दबाने के लिए छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे में पारदर्शिता नहीं रही और मंदिर निर्माण से पहले प्राप्त धनराशि का भी कोई हिसाब नहीं है।

सुबह से शाम तक चला स्वागत का दौर

नई दिल्ली से बुधवार सुबह निकले प्रदेश प्रभारी का मथुरा, इटावा, कानपुर, उन्नाव सहित विभिन्न स्थानों पर स्वागत हुआ।। देर शाम वह लखनऊ पहुंचे। डॉ आंबेडकर महासभा में अस्थि कलश पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।। शहर के विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर देर शाम प्रदेश मुख्यालय पहुंचे।। यहां प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, डॉ सीपी राय, मनोज यादव सहित अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। 

चंदा चोरी का मुद्दा उठाया

विभिन्न स्थानों पर मीडिया से बातचीत में प्रदेश प्रभारी ने अयोध्या चंदा चोरी प्रकरण को जोर शोर से उठाया।। उन्होंने कहा कि सिर्फ मंदिर बनने के बाद ही नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण शुरू होने से पहले भी करीब 1,400 करोड़ रुपये का चंदा आया था। उस पैसे का क्या हुआ, किसी को नहीं पता।उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चोरी या जेबकतरी नहीं, बल्कि वर्षों से डकैती चल रही है। लोगों ने आस्था के साथ हजारों करोड़ रुपये का दान दिया, लेकिन इन लोगों ने जनता की श्रद्धा और विश्वास का इस्तेमाल अपनी राजनीति के लिए किया। गौतम ने कहा कि जनता अब सब कुछ समझ चुकी है और इसका जवाब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देगी। उन्होंने कहा इसका जवाब उत्तर प्रदेश से शुरू होगा और फिर पूरे देश में दिखाई देगा। 2029 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे और देश को इन लोगों से मुक्ति दिलाएंगे। ये लोग कुछ ही दिनों के मेहमान हैं।

निजी सुरक्षा पर उठाया सवाल 

उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। गौतम ने कहा,”चंपत राय की निजी सुरक्षा पर सालाना 12 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इसके लिए 400 कर्मचारी रखे गए हैं। जब पुलिस और सीआरपीएफ मौजूद हैं तो हर महीने एक करोड़ रुपये की निजी सुरक्षा की क्या जरूरत है? क्या मंदिर ट्रस्ट को देश की पुलिस और सीआरपीएफ पर भरोसा नहीं है? संदेह है कि निजी सुरक्षा के नाम पर पैसे का लेन-देन किया गया। अगर पुलिस के सामने पैसे लिए जाते तो मामला उजागर हो जाता। यह भी चिंता का विषय है कि एफआईआर दर्ज कराने में 20 दिन लगा दिए गए। अपने वकील होने का उल्लेख करते हुए गौतम ने कहा कि मैं वकील हूं और किसी भी संज्ञेय अपराध में सबसे पहला कदम एफआईआर दर्ज कराना होता है। इन लोगों ने न केवल लोगों की आस्था के साथ विश्वासघात किया और दान की रकम हड़पी, बल्कि सांसदों, विधायकों और अब पूरी की पूरी राजनीतिक पार्टियां भी चुरा लीं।

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