
उपभोक्ता परिषद की याचिका पर नियामक आयोग ने पॉवर कार्पोरेशन को दिया निर्देश
11 अगस्त को पावर कारपोरेशन के निदेशक वाणिज्य को व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने पेश होने का आदेश
लखनऊ। विद्युत नियामक आयोग ने आदेश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से जिन विद्युत उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर के नाम पर अतिरिक्त राशि ली गई है,उसे लौटाना होगा। ऐसे में मनमानी तरीके से वसूली गई करीब 200 करोड़ की रकम उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश जारी किया गया है। यह निर्देश शनिवार को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह ने उपभोक्ता परिषद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया।
विद्युत वितरण निगमों ने नए विद्युत कनेक्शनों पर सिंगल फेज के कनेक्शन पर 6016 और 3 फेज के कनेक्शन पर रुपया 11341 की वसूली की गई, जिसमें अतिरिक्त धनराशि वसूली गई। सिंगल फेस कनेक्शन पर लगभग 3216 रुपए अधिक तथा तीन फेस कनेक्शन पर लगभग 7241 अधिक की वसूली की गई थी। इस संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में अवमानना याचिका दाखिल कर इस अवैध आदेश को तत्काल समाप्त करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई थी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक बिजली विभाग द्वारा कुल 3,53,357 नए कनेक्शन जारी किए गए। यदि इनमें से लगभग 10 प्रतिशत तीन फेस कनेक्शन मान लिए जाएं तो कुल मिलाकर लगभग 127.85 करोड़ की धनराशि वसूली गई है। दिसंबर तक यह करीब 200 करोड़ हो गई है। अब यह राशि उपभोक्ताओं को वापस करनी पड़ेगी। यह प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता परिषद ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जब तक उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त धनराशि वापस नहीं होगी, तब तक परिषद इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी। विद्युत नियामक आयोग के इस आदेश के बाद परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार तथा सदस्य संजय कुमार सिंह को प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की ओर से धन्यवाद और बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में उपभोक्ताओं के साथ स्पष्ट रूप से अन्याय और आर्थिक शोषण हुआ था। परिषद ने इस मुद्दे पर लंबी और गंभीर लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप आज उपभोक्ताओं को न्याय मिला है।

