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दलित अभियंताओं ने ऊर्जा प्रबंधन पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, दी चेतावनी

21 दिन के कार्यकाल के आधार पर निलंबन सहित विभिन्न मामले की मुख्यमंत्री को दी जानकारी, उत्पीड़न रोकने की मांग

प्रबंधन नहीं सुधरा तो शुरू होगा आंदोलन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन की प्रांतीय कार्य समिति की एक आवश्यक बैठक गुरुवार को फील्ड हॉस्टल कार्यालय में हुई। बैठक में प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों में कार्यरत दलित एवं पिछड़ा वर्ग के अभियंताओं की सेवा संबंधी समस्याओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों में दलित अभियंताओं से जुड़े मामलों को लेकर घोर चिंता एवं नाराजगी व्यक्त की गई। संगठन ने कहा कि अनेक बिजली कंपनियों में दलित वर्ग के अभियंता लगभग एक वर्ष से निलंबित हैं, लेकिन उनकी विभागीय पत्रावलियों पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कई मामलों में अभियंताओं के विरुद्ध किसी वित्तीय अनियमितता का आरोप तक नहीं है, इसके बावजूद उनके मामले लंबे समय से लंबित रखे गए हैं।

एसोसिएशन ने कहा कि नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक मामलों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए। छह माह से अधिक समय तक किसी मामले को लंबित रखना उचित नहीं है। लगभग एक वर्ष तक निलंबन की स्थिति में रहने से अभियंताओं को आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हाईकोर्ट से बहाली के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त
बैठक में दलित अभियंता मुकेश बाबू के प्रकरण को गंभीर उदाहरण के रूप में उठाया गया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि संबंधित अभियंता के विरुद्ध किसी वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं था, इसके बावजूद उन्हें निलंबित किया गया। मात्र 21 दिन के कार्यकाल में निलंबन; मुख्य अभियंता की पदोन्नति रोकी। अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अभियंता ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली। संगठन के अनुसार, माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उन्हें बहाल किया गया। इसके बावजूद निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त कर लिया गया तथा उनकी दो वेतन वृद्धियां भी रोक दी गईं। एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि जब अभियंता के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं था और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उनकी बहाली हुई, तो निलंबन अवधि के आधे वेतन की जब्ती तथा दो वेतन वृद्धियां रोकने की कार्रवाई किस आधार पर की गई? पदाधिकारियों ने कहा कि एक ही प्रकरण में निलंबन, निलंबन अवधि के वेतन की जब्ती और दो वेतन वृद्धियां रोकने जैसी कई कार्रवाइयां किया जाना गंभीर विषय है। संगठन ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा कराकर अभियंता को नियमानुसार देय सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। उन्होंने ने कहा कि मुकेश बाबू का प्रकरण एक उदाहरण मात्र है। संगठन के संज्ञान में ऐसे अन्य मामले भी आए हैं, जिनमें दलित अभियंताओं के अनुशासनात्मक मामले लंबे समय से लंबित हैं अथवा उनके सेवा लाभों का निस्तारण नहीं किया गया है।

सेवानिवृत्त दलित अभियंताओं के पेंशनरी लाभ भी लंबित
बैठक में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि अनेक दलित अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य पेंशनरी लाभ बड़े पैमाने पर लंबित हैं। उन्होने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को उनके देय सेवा लाभों के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा कराना गंभीर विषय है। एसोसिएशन ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की कि जिन अभियंताओं ने समय से अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है, उनके निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई, पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सेवा लाभों से संबंधित मामलों का तत्काल निस्तारण कराया जाए।

पिछले दो वर्षों के मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि पिछले दो वर्षों में बिजली कंपनियों में दलित अभियंताओं से जुड़े सभी अनुशासनात्मक एवं सेवा संबंधी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।संगठन का कहना है कि पिछले दो वर्षों के मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय समीक्षा से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली कंपनियों में दलित अभियंताओं के मामलों में कहीं अनावश्यक देरी, असमान व्यवहार अथवा जानबूझकर उत्पीड़न तो नहीं किया गया है। एसोसिएशन ने कहा कि उच्चस्तरीय जांच के माध्यम से निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन कटौती, वेतन वृद्धियां रोकने तथा पेंशनरी लाभ लंबित रखने जैसे मामलों की भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि दोषपूर्ण अथवा अन्यायपूर्ण कार्रवाई पाए जाने पर उसका नियमानुसार समाधान किया जा सके। संगठन ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की कि सभी लंबित मामलों की समीक्षा कर न्यायसंगत, पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय लिए जाएं तथा माननीय न्यायालयों के निर्देशों एवं विभागीय नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.पी. केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष पी.एम. प्रभाकर, संगठन सचिव राम शब्द, हरिश्चंद्र वर्मा, मुकेश बाबू, पूरन चंद, अनिल कुमार, वाई.एल. कनौजिया एवं अरिजीत सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि दलित एवं पिछड़ा वर्ग के अभियंताओं के न्यायसंगत अधिकारों, सम्मान और सेवा हितों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर मजबूती से अपनी आवाज उठाता रहेगा।

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