बाजार में बड़ी मात्रा में बिक रहे हैं क्रेमे बिस्किट, इसमें नहीं होता है असली दूध की क्रीम
लखनऊ। बाजार में बिकने वाले क्रीम बिस्किट को देखकर अक्सर लोग इसे दूध से बनी असली क्रीम वाला उत्पाद समझ लेते हैं लेकिन पैकेट पर लिखे एक शब्द से इसकी असलियत का पता चल सकता है। बिस्किट के पैकेट पर यदि क्रीम लिखा है तो इसका संबंध दूध से बनी क्रीम से होता है, जबकि क्रेमे लिखे होने पर यह जरूरी नहीं कि उसमें असली दूध की क्रीम मौजूद हो।
क्रेमे फिलिंग में आमतौर पर चीनी, वनस्पति तेल, परिष्कृत आटा, नमक, कृत्रिम स्वाद और विभिन्न प्रकार की वसा का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाजार में कई नामी कंपनियों के बिस्किट भी क्रेमे फिलिंग के नाम से बिक रहे हैं। देखने में यह बिस्किट क्रीम वाले ही नजर आते हैं लेकिन दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेमे फिलिंग वाले उत्पादों में यदि हाइड्रोजनीकृत या आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत वनस्पति वसा का इस्तेमाल हुआ है तो उसमें हानिकारक वसा की मात्रा होने की आशंका रहती है। इसका अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
क्रीम और क्रेमे में अंतर समझिए
क्रीम : दूध से प्राप्त वसा से बनी होती है। इसमें दूध की क्रीम का इस्तेमाल होता है और यह डेयरी उत्पाद की श्रेणी में आता है।
क्रेमे : यह नाम अक्सर बिस्किट और अन्य भरावन वाले उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें चीनी, वनस्पति तेल, परिष्कृत आटा, कृत्रिम स्वाद और वसा का मिश्रण हो सकता है। इसमें असली दूध की क्रीम होना जरूरी नहीं है।
इन चीजों से तैयार फिलिंग स्वाद में मीठी और आकर्षक लगती है। इसमें पोषण की मात्रा कम और कैलोरी अधिक हो सकती है। ऐसे उत्पादों का लगातार और अधिक सेवन वजन, मोटापा और शरीर में वसा बढ़ने की समस्या को बढ़ा सकता है। यदि उत्पाद में हानिकारक वसा मौजूद है तो लंबे समय तक सेवन से हृदय के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।


