
कांग्रेस ने ब्राह्मण चेहरे को हटाकर दलित पर जताया भरोसा, दलित वोटबैंक को साधने की रणनीति
लखनऊ। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश का प्रभारी बदल दिया है। राष्ट्रीय महासिचव अविनाश पांडेय को हटाकर पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को जिम्मेदारी सौंपी है। वह अभी कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ब्राह्मण चेहरे को हटाकर दलित पर भरोसा जताने के पीछे मूल वजह दलित वोटबैंक साधने की रणनीति बताई जा रही है। जल्द ही सह प्रभारियों को भी हटाए जाने की चर्चा है।
कांग्रेस ने पूर्व राज्य सभा सदस्य और नागपुर निवासी अविनाश पांडेय को 23 दिसंबर 2023 को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय निरंतर मैदान में डटे रहे। प्रदेश संगठन का विस्तार हुआ और दलित वोटबैंक
कों जोड़ने के लिए निरंतर अभियान चलाए गए। लोकसभा चुनाव में सपा- कांग्रेस गठबंधन हुआ। पार्टी को छह सांसद मिले। पिछले करीब दो माह से अविनाश पांडेय ने उत्तर प्रदेश आना छोड़ दिया था। तभी से बदलाव के कयास लगाए जा रहे थे। शुक्रवार को पार्टी शीर्ष नेतृत्व में प्रदेश प्रभारी पद पर राजेंद्र पाल गौतम को जिम्मेदारी सौंपी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र पाल मूल रूप से मेरठ के निवासी हैं। वह पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। बृहस्पितवार को लखनऊ में आयोजित भागीदारी सम्मेलन में शामिल हुए थे। इससे पहले वह बिना बुलाए मायावती से उनके आवास पर मिलने पहुंचने की वजह से सुर्खियों में रहे।
सह प्रभारियों का भी होगा बदलाव
कांग्रेस में जल्द ही प्रदेश सह प्रभारियों का भी बदलाव होगा। अभी यहां सह प्रभारी के रूप में धीरज गुर्जर, प्रदीप नरवाल, राजेश तिवारी, तौकीर आलम, सत्यनारायण पटेल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इनके स्थान पर नए लोगों की जिम्मेदौरी सौंपी जाएगी।
दलित वोटबैंक को जोड़ने की रणनीति
कांग्रेस का पुराना वोटबैंक दलित, पिछड़े और अल्पंख्यक रहे हैं। पार्टी इसे खुद से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। संविधान सम्मेलन से लेकर दलित महापुरुषों से जुड़े कार्यक्रमों को वरीयता दे रही है। अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाने के पीछे भी यही रणनीति मानी जा रही है। बदली सियासी परिस्थितियों में बसपा के तमाम दिग्गज नेता छिटके हुए हैं। कांग्रेस उन्हें अपने खेमे में करने को आतुर है। पार्टी के रणनीतिकार चाहते हैं कि वे दलित वोटबैंक को अपने खेमे में करने में सफल हो जाएं तो उत्तर प्रदेश में उनका वनवास खत्म
हो सकता है। वह सुरक्षित सीटों के साथ ही अन्य सीटों पर भी दलित चेहरों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। प्रदेश के प्रभारी बनाए जाने के बाद अमर उजाला से बातचीत में राजेंद्र पाल गौतम ने भी साफ कहा कि दलितों व पिछड़ों पर लगातार अन्याय हो रहा है। पार्टी उनकी लड़ाई लड़ रही है। गरीबों के हक, संविधान बचाने और दलित अस्मिता के लिए निरंतर संघर्ष हो रहा है। इसे दोगुनी गति से आगे बढाया जाएगा। उनकी कोशिश होगी कि भाजपा से शोषण के विरोध
करने वाले और जनता की आवाज उठाने वालों को संगठन से जोड़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की पुलिस इन दिनों दलितों व पिछड़ों को चिन्हित करके गोली मार रही है। इसका सड़क पर उतर कर विरोध किया जाएगा। अगले दो माह में संगठन को सक्रिय करके वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी की जाएगी।


