लखनऊ। प्रदेश में एक्यूट इंसेफेलाइटस सिंड्रोम (एईएस) रोगियों की संख्या में वर्ष 2017 से 2025 के बीच 85 प्रतिशत और इससे होने ,वाली मौत में 99 प्रतिशत की कमी आई है। इसी तरह जेई के रोगियों की संख्या में 96 प्रतिशत की कमी और मृत्यु में 98 प्रतिशत की कमी आई है।
प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न त रह की बीमारियों की नियंत्रण के लिए पुख्ता रणनीति बनाई गई है। एईएस व जेई के साथ ही डेंगू, मलेरिया की रोकथाम के लिए जांच, उपचार और निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रदेश में एकीकृत डिजिटल
सर्विलांस पोर्टल (आईडीएसपी) विकसित कर रोगों की निगरानी की जा रही है। इस पोर्टल पर कुल 34,334 लैब पंजीकृत हैं, जिनमें 31,885 सरकारी तथा 2,439
गैर-सरकारी लैब शामिल हैं। इसके जरिए16 संक्रामक रोगों और 6 वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज की नियमित जांच की जा रही है। जांच और उपचार व्यवस्थाओं में सुधार से डेंगू की मृत्यु दर जहां वर्ष 2017 में 0.91 थी, जो वर्ष 2025
में घटकर 0.06 रह गई है। इस अवधि में मृत्यु दर में लगभग 94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में सूचित मलेरिया रोगियों की संख्या 32,342 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 14,688 रह गई। इस प्रकार कुल रोगियों में लगभग 55 प्रतिशत की कमी आई है।
ब्लॉक स्तरीय इंसेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर
गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी सघन चिकित्सा इकाइयों में वेंटिलेटर सुविधा के साथ ही पीआईसीयू, ब्लॉक स्तरीय इन्सेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, वेंटिलेटर, सेंटिनल तथा एपेक्स प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। इससे इसका फायदा मिला। जागरूकता अभियानों, स्वच्छता कार्यक्रमों और सामुदायिक सहभागिता पर भी विशेष बल दिया। गांव-गांव सर्वे, लार्वा निरोधक छिड़काव, फॉगिंग तथा आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर संपर्क
अभियान चलाए गए। यही वजह है संचारी रोगों पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया गया।

